ज्ञानवापी मस्जिद में जांच का रास्‍ता साफ… तहखाने में क्‍या, जानिए केस के मुख्‍य पैरोकार की जुबानी

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नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated: May 12, 2022, 5:26 PM

ज्ञानवापी मस्जिद के तहखाने में सर्वे का रास्‍ता साफ हो गया है। इसके बाद तहखाने के कई राज खुलने के आसार हैं। वहीं, केस में मुख्‍य वकील हरिशंकर जैन को पूरा भरोसा है कि इसमें देवी-देवताओं के निशान मिलेंगे। इनकी निशानियां तो मस्जिद के बाहर से मिलती हैं। इसे लेकर उन्‍होंने एक केस का भी जिक्र किया।

Gyanvapi Masjid Case: ज्ञानवापी मस्जिद मामले में वीडियोग्राफी सर्वे का रास्‍ता साफ हो गया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि ज्ञानवापी मस्जिद के तहखाने को खुलवाकर सर्वे किया जाए। वीडियोग्राफी-सर्वे करने के लिए अदालत की ओर से नियुक्त कोर्ट कमिश्नर बदलने की मांग को भी खारिज कर दिया गया है। कोर्ट का आदेश आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि ज्ञानवापी के तहखाने के अंदर कैसे राज हैं? तहखाने में क्‍या मिल सकता है? इसे लेकर हिंदू पक्ष कितना आश्‍वस्‍त है? आइए, जानते हैं ज्ञानवापी केस के मुख्‍य पैराकार हरिशंकर जैन (Harishankar Jain) का इस पर क्‍या कहना है? हमारे सहयोगी न्‍यूज चैनल टाइम्‍स नाउ नवभारत ने इसे लेकर जैन से बात की। उन्‍होंने कहा क‍ि अंदर क्‍या मिलेगा वह इस बारे में नहीं कह सकते हैं। वह भविष्‍यवक्‍ता नहीं हैं। लेकिन, इतिहास कहता है कि वहां मंदिर था और उसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई है। वहां देवी-देवताओं के चिन्‍ह आज भी मौजूद हैं।



हरिशंकर जैन ने गुजरे समय में कई चिन्‍हों को मिटाने की बात भी कही। जैन ने बताया कि उन्‍हें पता चला है कि बीच में कई प्रतीकों को तोड़ा गया है। उस पर सफेदी की गई है। सीमेंट चढ़ा दी गई है। हालांकि, अब भी बहुत से प्रतीक मौजूद हैं। जैन ने कहा कि हाल में उन्‍होंने वहां जाकर देखा कि कमल का निशान है। नाग देवता का निशान है। ये सारी चीजें आपको मस्जिद के बाहरी हिस्‍से पर मिल जाती हैं। अंदर तो बहुत कुछ होगा।

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पहले होती रही है व‍िध‍िवत पूजा-अर्चना

जैन ने इसे लेकर एक मुकदमे का भी जिक्र किया। उन्‍होंने कहा कि यह मुकदमा 1936 में दाखिल हुआ था। वह मुकदमा मील का पत्‍थर है। मुकदमा दीन मोहम्‍मद बनाम भारत सरकार के बीच था। उसमें कोई हिंदू पक्षकार नहीं था। भारत सरकार ने दावे का विरोध करते हुए कहा था कि यह मस्जिद नहीं है। इसमें 16 हिंदू गवाह पेश हुए थे। इसमें प्रकांड पंडित, विद्वान, काशी हिंदू विश्‍वविद्यालय में इतिहास के जानकार, पुरातत्‍ववादी शामिल थे। तब सबने एक सुर में बयान दिया था कि वे सभी वहां विधिवत जाते हैं और पूजा करते हैं। वहां भगवान गणेश जी, नंदी जी, गंगा जी और अन्‍य कई देवी-देवता हैं। उसमें श्रृंगार गौरी सहित सभी चीजों के बारे में बताया गया है।

जैन ने कहा कि वह जजमेंट रिकॉर्ड में है। गवाहियां भी ऑन रिकॉर्ड हैं। उसे झुठलाया नहीं जा सकता है। उस गवाही को मुस्लिम पक्ष की ओर से चुनौती भी नहीं दी गई थी। एक बार नहीं कहा गया कि यह गवाही नहीं पढ़ी जाए। यह गलत है।

प्‍लॉट नंबर 9130 पर बनी है मस्‍ज‍िद

जैन ने दावा किया कि मुस्लिम पक्ष ने स्‍वीकार किया है या यूं कहें कि उनकी एडमिटेड पोजिशन है कि यह जो ज्ञानवापी मस्जिद है वह प्‍लॉट नंबर 9130 पर है। अयोध्‍या मंदिर के साथ जैसा चला कि मामले को लटका दो, वैसा ही इस केस में भी हुआ है। लोगों ने सच सामने आने नहीं दिया। जब यह सच सामने आने वाला होता है तो तमाम तरह के मुद्दों को उठाकर भटका दिया जाता है। महंगाई और गैस सिलेंडर के दाम बढ़ गए, यह मुद्दा भारत की अस्मिता से जुड़े मुद्दे से अलग है। इसे बायपास नहीं किया जा सकता है।

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जैन ने इसे राष्‍ट्रीय अस्मिता से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्‍होंने कहा कि हम अपने इष्‍ट देवताओं के बारे में कुछ न बोलें और बोलें तो लोग कहें कि सांप्रदायिकता फैला रहे हैं, यह सही नहीं है। इन सब चीजों से देश नहीं टूटने वाला है। वो जमाना गया। हमारे देश के नौजवानों में बहुत दम है।

गुरुवार को वाराणसी की एक जिला अदालत ने ज्ञानवापी-शृंगार गौरी परिसर का वीडियोग्राफी-सर्वे करने आदेश दिया। साथ ही अदालत की ओर से नियुक्त कोर्ट कमिश्नर को बदलने की मांग भी खारिज कर दी। अदालत ने 17 मई तक सर्वे का काम पूरा कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।

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